सोचिए यह कितने कायर है

सोचिए यह कितने कायर है ?

आपको इराक का सद्दाम हुसैन याद होगा जो बड़ी-बड़ी डींगे हांकता था हम आखरी सांस तक लड़ेंगे हम यह करेंगे हम लोग करेंगे और उसकी बड़ी बड़ी डिंगो से प्रभावित होकर उस वक्त भारत के कई शांतिदूतों के घर में जो बच्चे पैदा हुए उसका नाम सद्दाम हुसैन रख दिया गया।
यहां तक कि इस समय राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद के को जब बेटा पैदा हुआ था तब उसने भी अपने बेटे का नाम सद्दाम हुसैन रख दिया।

और वही सद्दाम हुसैन अंत में चूहे की तरह एक बिल में घुस गया था और जब अमेरिकी फौज ने उसे पकड़ा तब वह किसी भीगे चूहे की तरह कोई प्रतिकार तक नहीं किया। मुझे वह वीडियो याद है जब एक अमेरिकी सैनिक ने उससे कहा मुंह खोलो मुझे तुम्हारा डीएनए लेना है तब उसने तुरंत मुंह खोल दिया और बड़े आराम से अपना डीएनए दे दिया और चुपचाप अमेरिकी फौज की गाड़ी में बैठ गया।

अगर यह कौम बहादुर होती तो सद्दाम हुसैन अमेरिकी फौज से हाथों से ही लड़ते लड़ते शहीद हो जाता।

अब आपको लीबिया का कर्नल गद्दाफी याद होगा।
वह भी अपने अनुयायियों के सामने बड़ी-बड़ी डींगे हाँकता था और जब घिर गया था तब एक पुलिया के नीचे किसी खजेले कुत्ते की तरह छुप गया था और जब विद्रोही गुट के लोग वहां आए तब वो उनके पैरों पर गिर गिर कर जान की भीख मांगने लगा था। वह वीडियो फुटेज मैंने देखा था और सच कहूं उस वक्त मुझे कर्नल गद्दाफी के आंखों की वो कायरता लाचारी मुझे याद है और कर्नल गद्दाफी ने भी कोई प्रतिकार नहीं किया यदि वह बहादुर होता तो उन विद्रोहियों से लड़ते लड़ते शहीद हो जाता।

आपको ओसामा बिन लादेन भी याद होगा वह भी कितनी बड़ी बड़ी बातें करता था और अपने पास हमेशा AK-56 भी रखता था। लेकिन जब उसने अपने बंगले में गोली की आवाज सुनी थी तब वह अपनी तीन पत्नियों के पीछे छुप गया था। उसने एक बार भी अपना राइफल लेने की कोशिश नहीं किया था और यह बात नेशनल ज्योग्राफिक पर दिखाया भी गया था।
बड़ी-बड़ी डींगे हाँकना इन कायरो का हमेशा काम रहा.. हिंदुत्व की ताकत जिस दिन देख लेंगे उसे दिन पैंट में (गीला -पीला ) कर देंगे ।

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