1- भगवान ब्रह्म की उत्पत्ति कमल से हुई है जो कि गर्भोदकशायी विष्णु के नाभि से निकली है।
2- ब्रह्मा जी के चार मुख चार वेदों को प्रदर्शित करते हैं। रिगवेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद
3- ब्रह्मा जी के चार हाथ बुद्धि, मन, चित्त और अहंकार को प्रदर्शित करते हैं , प्रत्येक कल्प की शुरुआत में इन्ही तत्वों से यह सृष्टि की रचना करते हैं।
4- ब्रह्मा जी आयु 100 दिव्य वर्ष है। इनका एक दिन मनुष्यों के 4.32 अरब वर्ष के बराबर होता है इतना ही इनका एक रात भी होता है। ऐसे दिन रात मिलाकर इनका एक दिन होता है जोकि 8.64 अरब वर्ष के बराबर होता है।
5- ब्रम्हा जी कि कुल आयु 311×10^12 मानव वर्ष के बराबर होती है। अर्थात 311 ट्रिलियन वर्ष या 311 खरब साल।
6- ब्रम्हा जी ने अपने 6 मानस पुत्रों को उत्पन्न किया है जिनके नाम - मरिचि, अत्रि, अंगिरस, पुलस्त्य, पुलह और क्रतु है।
7- ब्रम्हा जी के दाहिने अंगूठे से दक्ष प्रजापति उत्पन्न हुए और बायें अंगूठे से प्रसूति नामक स्त्री उत्पन्न हुई जो कि पति पत्नी हुए। दक्ष सभी प्राणियों के प्रजापति हुए।
8- ब्रम्हा जी केवल ऐसे भगवान हैं जो हाथ में कोई भी हथियार नहीं रखते हैं।
9- स्वयंभू मनु ब्रम्हा जी के हृदय से उत्पन्न होते हैं जो कि सभी मनुष्यों के पिता हैं।
10- ब्रम्हा जी के अहंकार की वजह से इनकी पूजा नहीं होगी ऐसा श्राप शिव जी ने दिया है।
11- ब्रम्हा जी सबसे ऊंचे लोक सत्यलोक में रहते हैं।
